हम

बुजती नहीं प्यास किसी रन की एक बूंद से;
नहीं मिलती कभी मंजिल कोई एक मोड़ से।
कितने दिनों से पूछता हूँ में ये मन से,
की फिर क्यों मिलता है सुकून तेरी एक ज़लक से।।

नदी को समंदर से मिलते देखा था हमने;
बादलो को धरती पे  देखा था हमने।
सुना था की पत्थर भी पिगल जाते हैं प्यार के सामने,
इसी लिए तो सपनो में आपको कही देखा था हमने।

यादों की बरसातमें भीगे हुए हैं हम,
संगाथ मैं सपनो के खेल चुके हैं हम;
ज़िन्दगी तो कब की खो चुके हैं हम,
इसी लिए तो दिल के टुकड़े समेट रहे हें हम।

– TG

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